कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता: खाद्य सुरक्षा और नए अवसरों का युग

हाल ही में मुझे यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र मुक्त विश्वविद्यालय (YCMOU), कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और महाराष्ट्र शासन के कृषि विभाग के संयुक्त आयोजन में मुख्य वक्ता के रूप में बोलने का अवसर मिला।
कार्यक्रम का विषय था – “कृषि उत्पादन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग”।
इस कार्यक्रम में पेठ, त्र्यंबकेश्वर और नासिक तालुका के किसान, कृषि अधिकारी, प्राध्यापक और शोधकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
कार्यक्रम की पृष्ठभूमि थी – भारत सरकार की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 20वीं किस्त का वितरण।
पत्थर के औज़ार से स्मार्ट खेती तक – एक ऐतिहासिक सफर
मैंने अपने भाषण की शुरुआत एक साधी सी कल्पना से की –
सोचिए, हजारों साल पहले का एक किसान… हाथ में पत्थर का औज़ार… मिट्टी जोत रहा है।
समय बदला… हल आया, बैल आए, सिंचाई सीखी, फिर ट्रैक्टर, पंपसेट, खाद, बीज का विज्ञान आया।

दूसरी ओर, दुनिया ने कंप्यूटर का जन्म देखा…
एलन ट्यूरिंग ने पूछा – “क्या मशीन सोच सकती है?”
DARPA का शोध, इंटरनेट, IoT, बिग डेटा, मशीन लर्निंग… और अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)।
आज हम ऐसे दौर में हैं, जहाँ मशीन सिर्फ काम नहीं करती, बल्कि निर्णय भी लेती है।
AI क्या है और किसानों के लिए इसका मतलब क्या है?
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी – कंप्यूटर को इंसान जैसी सोचने की क्षमता देना।
लेकिन यह सोच केवल अनुभव पर नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर एकत्र किए गए डेटा पर आधारित होती है।
खेती में इसका मतलब:
- कीट और रोग आने से पहले ही उनका अनुमान।
- सिंचाई का सटीक प्रबंधन।
- सही समय पर सही फसल की सिफारिश।
- बाजार भाव का पूर्वानुमान लगाकर बिक्री की योजना।
यह केवल विचार नहीं – बल्कि नीदरलैंड, इज़रायल, अमेरिका, चीन जैसे देशों में यह आज हो रहा है।

भारत में AI खेती – बदलाव की रफ़्तार
भारत में Fasal, CropIn, AgNext, DeHaat जैसे स्टार्टअप किसानों की मदद कर रहे हैं:
- ड्रोन और सैटेलाइट से फसल की निगरानी।
- मोबाइल ऐप से कीट पहचान।
- मिट्टी के पोषक तत्वों के आधार पर सिंचाई नियंत्रण।
- बाज़ार की मांग का अनुमान।
AI खेती में तीन चरणों में इस्तेमाल हो सकता है:
- बुवाई से पहले – मिट्टी की जांच, फसल योजना।
- फसल वृद्धि के दौरान – रोग/कीट नियंत्रण, पानी प्रबंधन।
- कटाई के समय – उत्पादन अनुमान, बाज़ार से जुड़ाव।
AI – नौकरियाँ कम करने वाला नहीं, बल्कि नई नौकरियाँ बनाने वाला
अक्सर लोग सोचते हैं – “AI आएगा तो नौकरियाँ चली जाएँगी।”
सच तो यह है कि AI नई तरह की नौकरियाँ पैदा करता है:
- एग्री डेटा साइंटिस्ट
- ड्रोन ऑपरेटर
- AI आधारित कृषि सलाहकार
- Digital Krishi Mitra
इससे गाँव का युवा गाँव में रहकर भी वैश्विक स्तर का काम कर सकता है।
चुनौतियाँ और समाधान
चुनौतियाँ:
- डिजिटल ज्ञान की कमी
- इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या
- स्थानीय भाषा में उपकरणों की कमी
समाधान:
- हिंदी/स्थानीय भाषा में ऐप्स
- गाँव-गाँव प्रशिक्षण
- सरकारी योजनाओं के साथ निजी क्षेत्र का सहयोग
अभी इसका महत्व क्यों है?
दुनिया की आबादी 2050 तक 10 अरब तक पहुँच जाएगी।
खाद्य सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती होगी।
कृषि में AI केवल दक्षता के लिए नहीं, बल्कि हर व्यक्ति तक भोजन पहुँचाने की गारंटी के लिए है।
भारतीय कृषि के लिए सकारात्मक तस्वीर
मैंने अपने भाषण के अंत में किसानों से कहा:
“मशीनें हमारे दुश्मन नहीं हैं। सही ज्ञान और दिशा दी जाए, तो AI किसान का सबसे भरोसेमंद साथी बन सकता है।”
AI दूसरी हरित क्रांति है – लेकिन इस बार यह डेटा पर आधारित है।
सही योजना, प्रशिक्षण और सहयोग से भारत दुनिया का अन्नदाता बन सकता है।
कार्यक्रम की मुख्य बातें
- आयोजक: YCMOU – कृषि विज्ञान केंद्र, नासिक
- सहयोग: महाराष्ट्र शासन का कृषि विभाग
- उद्देश्य: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त
- श्रोता: किसान, कृषि अधिकारी, विद्यार्थी, प्राध्यापक
- उपस्थित मान्यवर: रवींद्र माने (जिला कृषि अधिकारी), अभिमन्यु काशीद (ATMA परियोजना संचालक), रवींद्र वाघ (उपविभागीय कृषि अधिकारी), डॉ. नितीन ठोके और अन्य अधिकारी।




इस कार्यक्रम में मुझे आमंत्रित करने के लिए आयोजकों का हृदय से धन्यवाद।
यह केवल तकनीक पर भाषण नहीं था – बल्कि भविष्य की खेती, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर एक संवाद था। आइए, तकनीक का उपयोग कर अपने अन्नदाताओं को और सक्षम बनाएं।

